Monday 30 November 2020, 01:23 PM
जाकिर नाइक को पनाह मिलने के बाद मलेशिया के कट्टर कार्यक्रमों का अध्ययन कर रहा भारत
By सुमित कुमार सिंह | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 11/10/2020 4:43:39 PM
जाकिर नाइक को पनाह मिलने के बाद मलेशिया के कट्टर कार्यक्रमों का अध्ययन कर रहा भारत

नई दिल्ली: भारत पूर्व मलेशियाई सरकार के कट्टरता को बढ़ावा देने वाले कथित कार्यक्रम और साहित्य का अध्ययन कर रहा है, क्योंकि इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक ने पिछले चार वर्षों से मलेशिया में शरण ली हुई है और भारत में नाइक के खिलाफ आतंकी गतिविधियों और धनशोधन के आरोपों की जांच कर रही है। शीर्ष सरकारी सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

सूत्र ने कहा कि सरकार पूर्व मलेशियाई सरकार के कथित कट्टरतापूर्ण कार्यक्रमों का अध्ययन कर रही है कि क्या इसका इस्तेमाल भारतीय संदर्भ में किया हो सकता है।

नाइक पर भारत में अभद्र भाषा के साथ-साथ धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोप लगे हैं। नवंबर 2016 में भारत की आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने नाइक के खिलाफ एक मामला दायर किया, जिसमें उन पर धार्मिक घृणा और गैरकानूनी गतिविधि को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था।

मलेशिया में महाथिर बिन मोहम्मद सरकार के दौरान, देश में एक मजबूत कट्टर नीति अपनाई गई। मलेशिया की कट्टर या डेराडिकेलिशन पहल धार्मिक पुनर्वास कार्यक्रम है, जो पुन: शिक्षा और पुनर्वास पर आधारित है।

सरकार ने कट्टरपंथ का मुकाबला करने में विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई रणनीतियों का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों की एक टीम भी बनाई है। केंद्र ने देश भर के सुरक्षा प्रतिष्ठानों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि सभी राज्यों पर लागू होने वाले रोड मैप को कट्टरपंथी व्यक्तियों की पहचान और उनका पीछा करने के लिए विकसित किया जा सके।

केंद्र ने यह भी कहा है कि विभिन्न विभागों और संगठनों के जिला और जमीनी स्तर के अधिकारियों को कट्टरता के बारे में संवेदनशील बनाया जाना चाहिए। क्योंकि वे अपने नियमित कामकाज में ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं।

निर्देशों में कहा गया है कि कट्टरता में व्याप्त व्यक्तियों का डेटाबेस तैयार होना चाहिए और इसमें विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक की सेवाओं का भी उपयोग किया जाए। इस दिशा में कट्टर गतिविधियों की पहचान के लिए पांच-छह प्रेरक कारकों को जानने पर भी जोर दिया गया है।

इसमें आगे बताया गया है कि टीमों को व्यावहारिक रणनीतियों के लिए एक रोडमैप तैयार करना चाहिए। केंद्र ने विशेष रूप से कहा कि अतीत में कई आतंकी लिंक सीधे या अन्यथा हैदराबाद के साथ जुड़े थे। इसलिए कहा गया है कि टीमों को इसके पीछे के कारणों का अध्ययन करना चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए।

भारत में इस्लामिक स्टेट के प्रभाव के बारे में बात करते हुए राज्य मंत्री (गृह मंत्रालय) जी. किशन रेड्डी ने 16 सितंबर को कहा था कि विभिन्न राज्यों के व्यक्तियों के कुछ उदाहरण हैं, जिनमें दक्षिणी राज्य शामिल हैं, जो इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल हो गए हैं। इसके बारे में सुरक्षा एजेंसियों को भनक लगी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में आईएस की उपस्थिति से संबंधित 17 मामले दर्ज किए हैं और 122 आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच से पता चला है कि आईएस केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और जम्मू और कश्मीर में सबसे अधिक सक्रिय है।

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