Thursday 27 June 2019, 05:33 AM
चक्रव्यूह की तर्ज पर बने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से करोड़ों होंगे प्रेरित
By प्रताप सिंह तालान | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 5/17/2019 2:59:58 PM
चक्रव्यूह की तर्ज पर बने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से करोड़ों होंगे प्रेरित
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तीनों सेनाओं के चीफ

गत 25 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध-स्मारक का उद्घाटन करके देश की एक बहुत पुरानी माँग को पूरा कर दिया। करीब 40 एकड़ क्षेत्र में फैला यह स्मारक राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट के ठीक पीछे स्थित है। इसमें देश के उन 25,942 शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्होंने सन 1962 के भारत-चीन युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1947, 1965, 1971 और 1999 के करगिल तथा विभिन्न काउंटर इन्सर्जेंसी ऑपरेशनों तथा श्रीलंका और संयुक्त राष्ट्र के अनेक शांति-स्थापना अभियानों में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। 

यह युद्ध स्मारक हमारे महान भारत की वीरता का तीर्थ है। यह भारतीयों द्वारा स्वतंत्र भारत के सेनानियों की स्मृति में, स्वतंत्र देश की जनता के धन से बना सच्चा भारतीय स्मारक है, जो भारत की जनता को समर्पित है। दिल्ली में, दासता के तमाम अवशेष पड़े हैं,राष्ट्रीयता के इस सैन्य-शौर्य तीर्थ का उदय स्वातंत्र्य ज्योति की अमर्त्य शिखा को अभिव्यक्त करता है।

इस राष्ट्रीय युद्ध-स्मारक में पत्थर का एक स्मारक स्तम्भ बनाया गया है जिसके आधार पर एक अखंड ज्योति स्थापित की गई है। इस ज्योति के अलावा पास में ही प्रज्ज्वलित अमर जवान ज्योति भी जारी रहेगी। 

राष्ट्रीय युद्ध-स्मारक की प्रेरणा महाभारत के प्रसिद्ध चक्रव्यूह से ली गई है। मुख्य स्मारक चार चक्रों के रूप में है,जो एक-दूसरे को घेरते हैं। चारों चक्र भारत की सशस्त्र सेनाओं के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पहला है अमर चक्र, जिसके भीतर है 15 मीटर ऊँचा स्मारक स्तम्भ और अखंड ज्योति। 

वीरता चक्र में देश की थलसेना, वायुसेना और नौसेना द्वारा लड़े गए छह महत्वपूर्ण युद्धों को शामिल किया गया है। इन्हें कांस्य भित्ति-चित्रों (म्यूरल्स) से प्रदर्शित किया गया है। त्याग चक्र में 1.5 मीटर ऊँची दीवार पर शहीदों के नाम लिखे हैं। सबसे बाहरी रक्षक चक्र में 695 वृक्षों का घेरा है, जो सुरक्षा में खड़े सैनिकों का प्रतिनिधित्व करता है। 

मुख्य संकुल के पास ही 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि के रूप में उनकी कांस्य-प्रतिमाएं लगाई गईं हैं। सन 2014 में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध-स्मारक के रूप में एक विश्व-स्तरीय संरचना की परिकल्पना की थी। सन 2015 में शासन ने पिं्रसेस पार्क में राष्ट्रीय युद्ध-स्मारक बनाने की अनुमति दी और जुलाई 2017 में राजस्थान से लाए गए ग्रेनाइट और बलुआ पत्थरों से इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। 

राष्ट्रीय युद्ध-स्मारक की पूरी संरचना चार चक्रों पर आधारित है -अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र और रक्षक चक्र। छह कांस्य म्यूरल्स थलसेना, वायुसेना और नौसेना के युद्धों को दर्शाते हैं। इस स्मारक को शुरू करने के पहले भारतीय सेनाओं की परम्परा के अनुसार एक सर्वधर्म प्रार्थना आयोजित की गई। अभी तक देश में कोई राष्ट्रीय युद्ध-स्मारक नहीं था। इंडिया गेट में जो स्मारक था, वह अंग्रेजों ने पहले विश्व-युद्ध (1914-1918) के शहीदों से सम्मान में बनाया था। 

उल्लेखनीय है कि रूस व यूरोप के कई देशों में स्थित युद्ध स्मारकों को वहां के नागरिक काफी महत्व देते हैं क्योंकि पहले और दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लाखों सैनिकों के परिजन उनके बलिदान की कद्र करते हैं। यहां तक कि नव विवाहित जोड़े ऐसे युद्ध स्मारकों पर जाकर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। ऐसा ही कुछ यदि हमारे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर भी हो तो आने वाली पीढि़यों को भी देश की आजादी और वीरों की कुर्बानियों का महत्व समझ में आ सकेगा। इसके लिए भारतीय सेनाओं को कुछ योजनाएं तैयार करनी चाहिए। ' 

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