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यूपी 'डिफेंस कॉरिडोर' ने तेजी पकड़ी
By डिफेंस मॉनिटर ब्यूरो | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 11/19/2018 7:14:31 PM
यूपी 'डिफेंस कॉरिडोर' ने तेजी पकड़ी

देश की नई स्ट्रैटेजिक पार्टनर और 'मेक इन इंडिया' नीतियों को व्यावहारिक रूप देने के लिए केंद्र ने उत्तर और दक्षिण भारत में दो औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने का फैसला किया है। दक्षिण में तमिलनाडु को कॉरिडोर में बड़ा स्थान मिला है। इस साल फरवरी में निवेशकों के एक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसका काफी बड़ा हिस्सा बुंदेलखंड में होगा। उसके बाद से इस दशा में बड़ी तेजी से काम शुरू हो गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने आईआईटी कानपुर की मदद से एक विशेष तकनीकी उत्कृष्टता केंद्र इसके लिए स्थापित करने की तैयारियाँ कर ली हैं। आईआईटी कानपुर से खास तौर पर एयरोनॉटिक्स के लिए और बीएचयू आईआईटी से गोला-बारूद से जुड़े प्रोजेक्ट में तकनीकी मदद ली जाएगी।

मई में उत्तर प्रदेश सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए यूपी रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2018 को मंगलवार को मंजूरी दे दी। इससे यूपी में ही कई प्रकार के रक्षा उपकरण बन सकेंगे। केंद्र सरकार ने अपने ह्यमेक इन इंडियाह्ण कार्यक्रम के साथ उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम तैयार किया है। इस नीति को यूपी कैबिनेट की औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने बताया कि नई नीति से अगले 5 साल में प्रदेश में 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 2.5 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। 

इस कार्यक्रम में दो प्रकार की यूनिटों की व्यवस्था है। एक एंकर और दूसरी मेगा एंकर इकाई (1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश)। एंकर इकाई के लिए प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के अलग-अलग मानक रखे गए हैं। बुंदेलखंड व पूर्वांचल में 200 करोड़ से अधिक के निवेश और न्यूनतम 1000 प्रत्यक्ष रोजगार। मध्यांचल व पश्चिमांचल में 300 करोड़ से अधिक निवेश और न्यूनतम 1500 प्रत्यक्ष रोजगार। गौतम बुद्धनगर व गाजियाबाद में 400 करोड़ से अधिक निवेश व न्यूनतम 2000 प्रत्यक्ष रोजगार। मेगा एंकर इकाई के लिए रक्षा पीएसयू व आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड को रियायती दर पर पट्टे की जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। 

यह कॉरिडोर अलीगढ़, आगरा, झांसी, चित्रकूट, कानपुर व लखनऊ से होकर गुजरेगा। इसका मुख्य फोकस बुंदेलखंड क्षेत्र में होगा। वहां सस्ती जमीन के बड़े-बड़े पार्सल उपलब्ध होंगे। यहां 3000 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हो गया है। इस बीच झांसी में बन रहे डिफेंस कॉरिडोर के लिए पहले निवेशक और यूपी सरकार के बीच 625 करोड़ रुपए की सहमति बन गई है। दोनों के बीच सहमति पत्र भी साइन हो चुका है। कंपनी तीन चरणों में 625 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। 

प्रदेश का 'डिफेंस कॉरिडोर' छह स्थानों पर क्लस्टर के रूप में विकसित होगा। क्लस्टर के केंद्र अलीगढ़, आगरा, कानपुर, लखनऊ, झांसी और चित्रकूट में होंगे। कंपनियां रक्षा आयुध व उपकरण के लिए इसी कॉरिडोर में अपनी-अपनी यूनिट लगाएंगी। इसमें जो कंपनियां शामिल की जा रही हैं, उनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल) की तीन यूनिट, यूपी की नौ आयुध फैक्ट्रियां और दो दर्जन प्राइवेट फैक्ट्रियों के साथ-साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड भी शामिल हैं। 

बुंदेलखंड क्षेत्र में 'डिफेंस कॉरिडोर' का काम मार्च महीने से शुरू हो गया। झांसी के साथ-साथ अलीगढ़, चित्रकूट, आगरा और कानपुर में भी इस कॉरिडोर के जरिए निवेश होगा। बुंदेलखंड के सातों जिले झांसी, जालौन, ललितपुर, चित्रकूट, हमीरपुर, बांदा और महोबा इसमें शामिल हैं। कॉरिडोर के लिए ऐसे क्षेत्र का चयन किया गया है, जिसे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के माध्यम से आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके। 

झांसी कॉरिडोर में एयरक्राफ्ट मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री और ड्रोन मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री विकसित की जाएगी। झांसी में थलसेना का बड़ा अड्डा है तो दूसरी तरफ बुंदेलखंड को छूते कानपुर और आगरा में वायुसेना का बड़ा अड्डा है। आगरा, मथुरा, कानपुर, इलाहाबाद, फतेहगढ़ थलसेना के गढ़ हैं। मध्य प्रदेश का ग्वालियर भी वायुसेना का संवेदनशील अड्डा है। 'डिफेंस कॉरिडोर' बनने से ये सभी सैन्य-क्षेत्र एक गलियारे में समन्वित हो जाएंगे। ग्वालियर से बीस किलोमीटर दूर मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में भी विदेशी निवेश से एक साझा उपक्रम स्थापित किया गया है। साझा उपक्रम में इसराइली कंपनी एसके ग्रुप और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनी पुंज लॉयड छोटे हथियारों का निर्माण कर रही है। 

 

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