Wednesday 30 September 2020, 01:23 AM
'हाइड्रोप्लेनिंग'विमान दुर्घटनाओं का बड़ा कारण
By सुशील शर्मा | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 8/7/2020 10:32:26 PM
'हाइड्रोप्लेनिंग'विमान दुर्घटनाओं का बड़ा कारण

अक्सर रनवे पर विमानों के फिसल जाने की खबरें आती रहती हैं। दरअसल विमानों के इस तरह से फिसल जाने का बड़ा कारण हाइड्रोप्लेनिंग होता है। बारिश के दौरान सड़क पर कारों का फिसलना भी हाइड्रोप्लेनिंग के कारण होता है। आइये जानते हैं क्या होता है हाइड्रोप्लेनिंग।

गीले रनवे पर उतरते समय कई बार विमान हाइड्रोप्लेनिंग के शिकार होकर निर्धारित दूरी से आगे निकल कर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। दुनिया भर में इस कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पायलट को रनवे पर पानी की मात्रा की अधूरी जानकारी मिलना,  इसका एक बड़ा कारण है। एक वरिष्ठ पायलट कैप्टन ए. रंगनाथन  के मुताबिक, हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष अक्सर यह तो जानकारी दे देता है कि रनवे गीला है, लेकिन गीलेपन के स्तर की जानकारी नहीं दी जाती।

रंगनाथन के मुताबिक रनवे पर यदि 3 एमएम से कम पानी हो तो उसे गीला कहा जाता है, लेकिन इससे ज्यादा पानी हो तो उसे कंटेमिनेटिड यानी असुरक्षित माना जाता है।

जल भराव वाले रनवे पर हाइड्रोप्लेनिंग की आशंका ज्यादा रहती है। रनवे पर जब पानी होता है तो वह विमान के टायर में प्रवेश कर जाता है। इससे विमान और सतह के बीच पानी का एक दबाव पैदा हो जाता है। जिससे सतह और टायर के बीच एक पतली पानी की फिल्म बन जाती है।  इस दबाव के कारण विमान का टायर सतह पर ठीक से नहीं  बैठता और फिसल जाता है।

ऐसे विमान को रोकने के लिए ज्यादा रनवे की जरूरत पड़ती है। चूंकि टायर सतह पर ठीक से नहीं बैठ पाता, इसलिए दिशा अनियंत्रित हो जाती है और विमान हवाई पट्टी के दाएं या बाएं निकल कर कच्ची जमीन में धंस जाता है। यदि तेज हवा(क्रॉस विंड) चल रही हो तो हाइड्रोप्लेनिंग का शिकार विमान पूरी तरह अनियंत्रित हो कर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। गीलेपन के अलावा, रनवे के दोनों सिरों पर सफेद पेंट के जरिए निशान लगाना और उतरते विमान के पहियों की रगड़ से रनवे पर टायरों के रबड़ का जमा हो जाना हवाई पट्टी को और भी फिसलन भरा बना देता है।

कैप्टन रंगनाथन ने बताया कि हाल के वर्षों में गीले रनवे के कारण बड़े जेट विमानों के रनवे से आगे निकल जाने (रनवे ओवर रन) की घटनाएं बढ़ रही हैं। वर्ष 1970 से 1995 के बीच विश्व भर में औसतन सालाना ओवर रन की चार घटनाएं होती थी, वर्ष 2005 आते-आते ऐसी घटनाओं की संख्या सालाना 40 हो गईं। जानकारों के मुताबिक अब हर  वर्ष ओवर रन के हादसे ज्यादा हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पायलटों को यदि गीले रनवे पर भी प्रशिक्षित किया जाए और एटीसी(हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष) पायलट को गीलेपन की सही जानकारी दे तो दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। विकसित देशों ने इस समस्या से बचने के लिए खांचेदार(ग्रुव्ड) हवाई पट्टियां बना रहे हैं। ऐसे हवाई पट्टियों पर टायर की पकड़ बेहतर होती है और विमान नहीं फिसलता।  भारत में अभी तक कोई भी ऐसी हवाई पट्टी नहीं हैं।

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