Tuesday 17 September 2019, 06:11 PM
टाइटेनिक: ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक गाथा
By सुशील शर्मा | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 5/14/2019 4:31:10 PM
टाइटेनिक: ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक गाथा

उत्तरी अटलांटिक महासागर में विलासिता की सारी सुविधाओं से युक्त जिस 'टाइटेनिक' यात्री जहाज के डूबने की घटना ने यूरोप और अमेरिका के अधिकांश देशों को दहला दिया था, उसी पर करीब-करीब एक सदी बाद बनी फिल्मों ने दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर भारी सफलता हासिल की और इसी के साथ सारी दुनिया को फिर से इस त्रासदी की याद ताजा करा दी। जांच के दौरान अनेक रोमांचक और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

लेकिन, अखबारों में इस घटना के कवरेज का सिलसिलेवार वर्णन असाधारण है। अमेरिकी लेखक वायन क्रैग वेड की पुस्तक 'दि टाइटेनिक एंड ऑफ अ ड्रीम' में, टाइटेनिक दुर्घटना की अखबारों में कवरेज और विशेष रूप से न्यूयॉर्क टाइम्स की भूमिका पर, ऐसे अनेक तथ्यों का रहस्योद्घाटन किया गया है जिनसे भी मीडिया बहुत कुछ सीख सकता है। 

आज से 107 वर्ष पूर्व उत्तरी अटलांटिक महासागर में 'टाइटेनिक' नामक यात्री जहाज के डूबने की घटना ने यूरोप और अमेरिका के अंग्रेजीभाषी देशों की पूरी जनता को दहला दिया था। विलासिता की सारी सुविधाओं से युक्त इस जहाज की दुर्घटना पर 'टाइटेनिक' नाम से 1997 में बनी एक फिल्म ने दुनियाभर में बॉक्स ऑफिस पर भारी सफलता हासिल की। टाइटेनिक नाम से 1953 में भी एक अमेरिकी फिल्म बनी थी। 

फिल्म और इंटरनेट के जरिए, लोगों को इस दुर्घटना के बारे में तो जानकारी मिल गई, लेकिन अमेरिकी सीनेट ने, टाइटेनिक डूबने के महज 4 दिन बाद ही दुर्घटना की जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान कई रोमांचक और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। अमेरिकी लेखक वायन क्रैग वेड की, पहले 1979 और फिर 1986 में छपी पुस्तक 'दि टाइटेनिक एंड ऑफ अ ड्रीम' में, जांच कार्रवाई के अलावा टाइटेनिक से संबंधित कई जानकारियां पढ़ने को मिलती हैं। पुस्तक में टाइटेनिक दुर्घटना की अखबारों में कवरेज और विशेष रूप से न्यूयॉर्क टाइम्स की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला गया है। 

 
'टाइटेनिक' जहाज की दुर्घटना की, सबसे पहले खबर देने वाले अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने 107 वर्ष पहले उस दुर्घटना की तमाम खबरें देने में असाधारण दूरदर्शिता का परिचय दिया था। बेशक, आज पत्रकारिता और संचार के क्षेत्र में, दुनिया में भारी क्रांति आ गई है लेकिन एक सदी पहले, जब मार्कोनी ने बेतार का आविष्कार किया ही था और टेलीफोन को आए भी ज्यादा समय नहीं बीता था, तब न्यूयॉर्क टाइम्स ने, उस जमाने की इन नई टेक्नोलॉजी का, कितनी खूबसूरती से इस्तेमाल किया था, उससे आज की पत्रकारिता को शिक्षा लेने की जरूरत है। 14 अप्रैल, 1912 की रात, विलासिता का पर्याय 'टाइटेनिक' जहाज, कनाडा के तटवर्ती शहर न्यूफाउंडलैंड से करीब 600 कि.मी. दूर, उत्तरी अटलांटिक सागर में डूब गया था। उस रात, न्यूयॉर्क टाइम्स भवन की 18वीं मंजिल पर बैठे वायरलेस ऑपरेटर को, समाचार एजेंसी एपी की एक खबर मिली। संपादकीय विभाग नीचे की मंजिल पर था।

लिहाजा, नीचे खबर भेजने के लिए, धातु के एक शाफ्ट में रस्सी से बंधे लकड़ी के एक डिब्बे में, खबर का कागज रखकर नीचे गिरा दिया जाता था। संपादकीय विभाग में बैठे पत्रकारों को, किसी जरूरी खबर की जानकारी देने के लिए, रस्सी को जोर-जोर से हिलाया जाता था ताकि धातु के शाफ्ट से डिब्बे के टकराने की जोरदार आवाज हो। दफ्तर का कॉपी बॉय, डिब्बे से खबर ला कर अधिकारी को दिया करता था। उस रात जैसे ही यह खबर आई, शाफ्ट में डिब्बे के लगातार टकराने से, काफी तेज आवाज आने लगी। उस समय रात के 1.30 बजे थे। अखबार छपने जा चुका था।
 
लेकिन, कॉपी बॉय खबर पढ़ते ही अखबार के प्रबंध निदेशक कार वान एंदा की ओर लपका और उन्हें वह खबर दे दी। खबर न्यूफाउंडलैंड में केप रेस से आई थी। खबर थी, 'रविवार रात, अप्रैल 14 (एपी)। आज रात 10.25 बजे व्हाइट स्टार लाइन स्टीम शिप टाइटेनिक ने 'जल्दी आओ, डूब रहे हैं (कम क्विकली, ड्राउनिंग)' सीक्यूडी-आपात संदेश यहां मार्कोनी स्टेशन को दिया है। यह भी जानकारी मिली है कि जहाज एक बर्फीली चट्टान (आइसबर्ग) से टकरा गया है। जहाज से संदेश मिला है कि उसे तुरंत मदद चाहिए।'

द न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रबंध निदेशक कार वान एंदा
 
वान एंदा ने तुरंत, जहाज परिचालन कंपनी व्हाइट स्टार को फोन किया और हेलीफैक्स और मांट्रियाल स्थित, अखबार के संवाददाताओं से संपर्क किया। यह संदेश, कनाडा की एक जहाजरानी कंपनी एलन लाइन को भी मिला था जिसने इसे उस क्षेत्र से गुजर रहे अपने जहाज, 'वर्जीनिया' को भेजा। उस जहाज ने अपना मार्ग बदला और दुर्घटनास्थल की ओर बढ़ा। साथ ही टाइटेनिक की कंपनी व्हाइट स्टार के ही अन्य जहाजों, 'ओलिंपिक' और 'बाल्टिक' को भी ये संदेश मिल चुके थे। 'वर्जीनिया' ने वापस एक संदेश भेजा कि उसे टाइटेनिक से अंतिम त्राहिमाम संदेश रात 12.27 बजे मिला है। संदेश अस्पष्ट था और अचानक कट गया। 

उन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे थे। मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति रूजवेल्ट और तत्कालीन राष्ट्रपति टैफ्ट के बीच था। वान एंदा ने टाइटेनिक खबर के महत्व को देखते हुए, छप रहे अखबार से चुनाव की खबर को किनारे किया और सवेरे के संस्करण में, तीन कॉलम की हेडलाइन के साथ टाइटेनिक के बारे में खबर कुछ इस तरह छापी, 

नया जहाज टाइटेनिक आइसबर्ग से टकराया; 
आधी रात को डूब रहा है; 
महिलाओं को जीवन रक्षक नौकाओं में निकाला; 
अंतिम वायरलेस रात 12.27 बजे, अस्पष्ट।

वान एंदा ने, वायरलेस संदेशों के आधार पर, एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय हेडलाइन छापी थी जिससे मुकरना संभव नहीं था। वह गंभीर था और गहन सोच में डूबा हुआ था। उसने तय किया कि पिछली दुर्घटनाओं की खबरों के आधार पर, और सामग्री जुटाई जाए। लिहाजा वान एंदा ने, इस बीच अखबार के मोर्ग (पुरानी खबरों और आंकड़ों के भंडार) से, जहाज दुर्घटनाओं से संबंधित तमाम आंकड़े एकत्रित कर लिए। उसने इस बात पर दिमाग लगाया कि कई आपात संदेश भेजने के बाद, अंतिम वायरलेस संदेश अस्पष्ट क्यों आया? आखिर उसने फैसला कर लिया और न्यूयॉर्क टाइम्स के नगर संस्करण में, एंदा ने टाइटेनिक के डूब जाने की खबर छाप दी।
 
टाइटेनिक जहाज की निर्माता कंपनी आईएमएम को, लगातार यात्रियों के परिजनों के फोन आने लगे। कंपनी की ओर से, वायरलेस संदेश अस्पष्ट होने के कारणों को लेकर दलील दी गई कि मशीन या मौसम में खराबी के कारण संदेश अस्पष्ट आया होगा। जहाज पर 1320 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों समेत कुल 2235 लोग सवार थे, 900 टन बैगेज, 3425 डाक के थैले और 6000 टन कोयला भी था। 

इटेलियन आविष्कारक मार्कोनी, रेडियो का आविष्कार कर, संचार के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाए थे। रेडियो और टेलीग्राफ नया-नया शुरू हुआ था, लिहाजा इसे नियंत्रित करने के लिए,तब तक कोई कानून नहीं था। जो चाहे इस 'खिलौने' से खेल रहा था। ऐसी स्थिति में कुछ संदेश मिले, जिनमें बताया गया कि टाइटेनिक के सभी यात्री सुरक्षित हैं और उन्हें, किसी दूसरे जहाज से, हेलिफैक्स लाया जा रहा है। इन संदेशों से यात्रियों के परिजनों को कुछ राहत मिली और न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रतिद्वंद्वी अखबारों ने, न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के विपरीत, बढ़-चढ़ कर यात्रियों के सुरक्षित होने की खबर छाप दीं। एक अखबार 'न्यूयॉर्क सन' ने खबर छापी 'टाइटेनिक की टक्कर के बाद सभी यात्री सुरक्षित'।
 
दूसरे अखबारों, 'वार्सेस्टर इवनिंग गेजेट' और 'बाल्टीमोर सन' ने भी जहाज और यात्रियों के सुरक्षित होने की खबरें छापीं। इस बीच, एक डिपार्टमेंटल स्टोर 'न्यूयॉर्क वानामेकर्स' के मालिक जॉन वानामेकर ने, एक 21 वर्षीय युवा रेडियो ऑपरेटर डेविड सारनॉफ को, नौकरी पर रखा। उस युवा ऑपरेटर ने, तमाम डिस्टरबेंस के बीच ओलिंपिक जहाज से आए एक संदेश को सुना, जिसमें कहा गया था कि टाइटेनिक जहाज रात 12.47 बजे डूब गया। 

उस जहाज के सिर्फ 675 लोग कुनार्ड लाइनर कंपनी के 'कारपाथिया' जहाज पर, सुरक्षित न्यूयॉर्क लाए जा रहे हैं। इस संदेश के बाद, फिर एक बार कोहराम मच गया। यात्रियों के परिजन जहाज कंपनी के दफ्तर को घेरने लगे। हिंसा की आशंका को देखते हुए, घुड़सवार पुलिस और अन्य पुलिस दस्ते बुला लिए गए। 'कारपाथिया' जहाज, 18 अप्रैल 1912 की शाम तक, न्यूयॉर्क पहुंचने वाला था। स्थानीय प्रशासन ने अस्पतालों और स्वयंसेवी संस्थाओं को अलर्ट कर दिया। तीसरे दर्जे के यात्रियों के लिए दान एकत्रित किया जाने लगा। पूरे शहर को 'कारपाथिया' के आने का इंतजार था। तमाम अखबार, यात्रियों और 'कारपाथिया' के चालक दल के सदस्यों से बातचीत करने के लिए, अपने रिपोर्टर कुनार्ड जेट्टी पर भेज रहे थे, जहां 'कारपाथिया' को आना था। उत्साही रिपोर्टर नौकाओं में बैठ कर 'कारपाथिया' के करीब पहुंचने की जुगत कर रहे थे। 

दूसरी ओर, न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार के कार वान एंदा ने, पल-पल की खबर देने के लिए, अनोखी और व्यापक तैयारी की थी। अखबार ने, कुनार्ड जेट्टी के पास ही एक होटल का पूरा फ्लोर, अपने रिपोर्टरों के लिए बुक कर लिया था। खबरें भेजने के लिए, रिपोर्टरों के लिए चार टेलीफोन विशेष रूप से लगाए गए, जिन्हें संपादकीय डेस्क से सीधे जोड़ा गया। खबरों में दोहराव न हो, इसके लिए एक इंटरव्यू बोर्ड लगाया गया, ताकि जिन यात्रियों से बातचीत हो चुकी है, उनसे फिर इंटरव्यू न किया जाए। अखबार के टेलीफोन ऑपरेटर को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए थे कि एक लाइन को छोड़ कर, बाकी सभी लाइनें सिर्फ टाइटेनिक की खबरों के लिए खुली रखी जाएं।
 
इस बीच 'कारपाथिया' जहाज, रेडियो के जरिए, किसी अखबार या किसी व्यक्ति को कोई जानकारी नहीं दे रहा था। यहां तक कि टाइटेनिक पर यात्रा कर रहे, अपने एक मित्र मेजर आर्किबाल्ड बट को लेकर चिंतित राष्ट्रपति टैफ्ट के तार का भी जवाब नहीं दिया था। टाइटेनिक के 'कारपाथिया' पर सवार यात्रियों में टाइटेनिक जहाज का मालिक ब्रुस इस्मे भी था। न्यूयॉर्क टाइम्स की विशेष नजर यात्रियों के अलावा इस्मे, 'कारपाथिया' के कैप्टन ऑर्थर रोस्ट्रोन और चालक दल के सदस्यों पर थी।

'कारपाथिया' जहाज के कैप्टन ऑर्थर रोस्ट्रोन
 
'कारपाथिया' जहाज रात 9.35 बजे किनारे लगा। हलचल बढ़ गई। 'कारपाथिया' व टाइटेनिक के यात्री, जहाज से उतर रहे थे, तभी अमेरिकी सीनेटर विलियम एल्डन स्मिथ, जिन्होंने इस दुर्घटना के कारणों की जांच की थी, जहाज पर गए और कैप्टन तथा चालक दल के सदस्यों से बात की। उसी समय दो और लोग भी जहाज पर गए। उनमें से एक थे, रेडियो संचार के आविष्कारक गुगलिएल्मो मार्कोनी और दूसरा था उनका एक मित्र जिसके बारे में बाद में पता चला कि वह न्यूयॉर्क टाइम्स का रिपोर्टर जिम स्पीयर्स था। मार्कोनी सीधे 'कारपाथिया' जहाज के वायरलेस रूम में गए। वहां टाइटेनिक जहाज के बचा लिए गए दूसरे नंबर के रेडियो ऑपरेटर हेरॉल्ड ब्राइड, बेतार मशीन से संदेश भेजने में व्यस्त थे।
 
ठंड से गल चुके पांव पर पट्टियां बंधी थीं। थकान के कारण चेहरा पीला पड़ चुका था लेकिन वह उस स्थिति में भी संदेश भेज रहे थे। वह उस हाल में भी, अपने काम में तल्लीन और इस बात से बेखबर थे कि उनके कमरे में स्वयं वही मार्कोनी खड़े हैं, जिनके बनाए यंत्र से वह संदेश भेज रहे हैं। यह बेतार यंत्र ही था जिससे भेजे गए संदेश के कारण ही, 'कारपाथिया' जहाज ने, टाइटेनिक के कुछ यात्रियों की जानें बचाई थी। मार्कोनी ने धीरे से ब्राइड से कहा, 'बेटे, अब संदेश भेजने का कोई लाभ नहीं है।' ब्राइड ने पलट कर देखा मार्कोनी खड़े हैं। सम्मान व्यक्त करने के लिए वह उठ खड़े हुए और मार्कोनी से कहा, 'मिस्टर मार्कोनी, फिलिप्स नहीं रहे।' जैक फिलिप्स टाइटेनिक के मुख्य बेतार ऑपरेटर थे। 
 
न्यूयॉर्क टाइम्स का रिपोर्टर स्पीयर्स अपनी नोटबुक में दोनों की बातचीत लिखता जा रहा था। स्पीयर्स की रिपोर्ट, अखबार के पहले पन्नेे पर, पांच कालम में छपी। ब्राइड द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर इस हृदय विदारक रिपोर्ट में टाइटेनिक के डूबने के अंतिम क्षणों का मार्मिक चित्रण था। यूं तो न्यूयॉर्क के सभी अखबारों ने टाइटेनिक दुर्घटना की खबरें विस्तार से छापी थीं। लेकिन, न्यूयॉर्क टाइम्स ने जिस तरह इस दुर्घटना के बारे में सबसे पहले जानकारी दी और बाद में भी बेहतरीन कवरेज की, उससे अखबार की प्रतिष्ठा काफी बढ़ गई।
 
यह जानकर ताज्जुब होता है कि उस जमाने में जब संचार के साधन अत्यंत सीमित थे, तब भी अखबार ने किस मुस्तैदी से खबर एकत्रित करने के लिए अपने रिपोर्टरों को तैनात किया, संसाधन जुटाए और लाजवाब खबरें छाप कर बढ़त हासिल की। यह संभव हुआ था अखबार के दूरदर्शी प्रबंध संपादक कार वान एंदा के प्रयासों से। एंदा ने 1925 में नौकरी छोड़ दी लेकिन 1932 तक, अखबार से सलाहकार के रूप में जुड़े रहे। उनका निधन 28 जनवरी, 1945 को न्यूयॉर्क में हो गया।   

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